How can we reduce the addiction of computer?
Addiction Of Computer

How can we reduce the addiction of computer?

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हम कंप्यूटर की लत को कैसे कम कर सकते हैं

जमाना बदल गया, अब कंप्यूटर इंटरनेट का युग आया है। कुछ अच्छे बदलाव भी हुये, ओर कुछ परेशानिया भी बढी। घातक बिमारीया भी हो रही है। आईये जानते है उसके बारे मे….

आज के समय में कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो कंप्यूटर से परिचित नही होगा। हमारे चारों तरफ कंप्यूटर है। कंप्यूटर आधुनिक जिदंगी का एक मुख्य हिस्सा बन गया है। इनके आविष्कार से लेकर अब तक ये छोटे और तेज बदल होते गए है। इनके बिना अब किसी काम की कल्पना भी नहीं कर सकते है। हर कोई कंप्यूटर का उपयोग अपने हिसाब से अलग-अलग कार्यों के लिए करता है। शिक्षक, लेखक तथा वैज्ञानिक शोध के लिए कंप्यूटर का उपयोग करते है। वहीं इंजिनियर्स, डिजाइनर्स अपने डिजाइन बनाने के लिए कंप्यूटर का इस्तेमाल करते है। कंप्यूटर के उपयोग से हमारे कार्यों में स्पीड एवं ऑक्कुरेसी आ जाती है. वैसे तो अब कंप्यूटर का महत्व लगभग हर क्षेत्र में साबित हो चुका है। और कुछ तो ऐसे क्षेत्र है जहाँ कंप्यूटर पर निर्भरता बढ़ने से इनका उपयोग अधिक होने लगा है। लेकीन जितना हम कंप्यूटर पे निर्भर होते जा राहे है, उतने ही घातक परिणाम सामने आ रहे है। गंभीर बिमारीया सामने आ राही है।

पिछले 25 वर्षों में, कंप्यूटर ने सभी क्षेत्रों में घुसपैठ की है। पहले बढे ओर पैसे वाले लोग ओर एसी मे काम करणे वाले लोग ही इसका इस्तमाल करते थे। लेकीन अब घोटा बच्चा भी अपने कमरे मे गोद मे laptop लेकर बैठ जाता है। अब बैंक, सरकारी कार्यालय, निजी कंपनियां, स्कूल, कॉलेज मे कंप्यूटर के बैगेर काम ही नही होता। कुछ दिनों के बाद, आने वाले वक्त मे वह बच्चा, बैग घर मे रख देगा, फिर पेंसिल, नोटबुक, पेन सभी बंद हो जाएंगे और बच्चे कंप्यूटर पर पढ़ना शुरू कर देंगे! और यहां तक कि माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा कंप्यूटर विशेषज्ञ बने! आजकल, इंटरनेट के कारण, कंप्यूटर को विभिन्न प्रकार की जानकारी और मनोरंजन के लिए एक उपकरण के रूप में भी देखा जाता है।

ऐसे सहायक कंप्यूटर का उपयोग कैसे करें! उचित देखभाल न करने से क्या स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं? कंप्यूटर से निश्चित रूप से जानकारी प्राप्त कर सकते है, लेकीन ज्ञान पाना मुश्किल है!

कंप्यूटर के उपयोग से शरीर को नुकसान नहीं होना चाहिए, इसलिए कुछ उपाय कर सकते है।

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Work Place

आप के काम करणे की जगह

आप जहा पर काम करते है, या फिर घर मे काम करते है, तो वो जगह कैसी हो, इसके बारे मे कोई सोचता ही नही। एक कार्यालय या घर जिसे अधिकतम क्षमता का उपयोग करके कम से कम जगह में अच्छी तरह से काम करने के लिए डिज़ाइन किया गया हो। फिर वहा पर स्वच्छ हवा, प्रकाश,दीवारों का रंग, पर्दे का रंग, वहा पे रखी हुई सामग्री, फर्नीचर (टेबल, कुर्सियां), आदि चीजो का एक सामान्य विचार के साथ सजाया गया हो। मॉनिटर को सीधे सूर्य के प्रकाश के संपर्क में नहीं आना चाहिए। पाणी की जगह न हो। आरामदायक वातावरण हो। जब बडी कंपनी अपना नया कार्यालय खोलती है, तो ये सारासार विचार करके ही बनाते है। जिसे की जो भी वहा पर काम करणे वाले कर्मचारी है, उनको तकलीफ कम हो ओर ज्यादा काम कर सके।  

जरुरी है आंखों की देखभाल

हम दिन रात कंप्यूटर के सामने ही बैठते है। ओर सिधा संपर्क आंखो का ही आता है। आंखों में दर्द, आंखों में जलन, आंखों में पानी आना, रात मे न दिखना, धुंधली दृष्टि, आंखो के नीचे काळे धब्बे आदि शिकायतें बढ़ रही हैं। और निश्चित रूप से इससे क्या होता है की, हमे सिरदर्द, चिड़चिड़ापन, बेचैनी, आदि आंखों पर तनाव के प्रभाव के कारण होता है। ऐसी शिकायतें भी है  जो बारबार कंप्यूटर के सामने बैठकर कम करता है। यही लोग ज्यादा शिकायत करते है।

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Long Time Sitting

ज्यादा बैठने से पेट के विकार

कंप्यूटर ऐसी चीज है की जिसके सामने घंटो-घंटो बैठकर ही काम करणा पडता है। कंप्यूटर के सामने घंटों बैठने वाले ज्यादातर लोग पेट खराब और अपच का शिकार हो जाते हैं। बैठकर काम करणे कि जीवन शैली के कारण कब्ज, नाराज़गी, गैस, भूख न लगना, पेट फूलना आदि इसी तरह की शिकायतें सामने आती हैं। कॉर्पोरेट सेक्टर में चिप्स, केक, चॉकलेट, आइसक्रीम, फास्ट फूड, चाय, कॉफी, सिगरेट, बिस्किट आदि भोजन करने से ये विकार और बिगड़ जाते हैं।  इसके लिए, पोली, भाजी, भात, आमटी जैसे भारतीय वर्ग के सात्विक भोजन का सेवन करना चाहिए। हर वक्त कंप्यूटर पर बैठने के बजाय, बीच में उठना चाहिये और घुमफिर कर आना चाहिये! बेशक, सुबह का व्यायाम, योग भी महत्वपूर्ण है। शाम को शतपावली किजीये, रात में हल्का भोजन, रात के खाने के तुरंत बाद ढाई से तीन घंटे के घुमणा चाहिये बाद मे सोने के लिये जाणा चाहिये। आदि चीजों को लागू करते है तो निश्चित रूप से फायदा होगा।

जरुरी है अंगूठे और उंगली की देखभाल

कंप्यूटर पर काम करते वक्त सबसे ज्यादा अंगूठे और उंगली का काम पडता है। ज्यादा काम करणे से तणाव महसूस होता है। कंप्यूटर का उपयोग करने का अर्थ है माउस और कीबोर्ड का उपयोग ज्यादा करना! हालांकि, इस कीबोर्ड के अति प्रयोग से कलाई का लगातार इस्तेमाल होता है। जिससे हाथ में ज्यादा खिचाव से सूजन हो जाती है। और उंगली मे दर्द होणे लागता है। उंगलियां (तर्जनी, मध्यमा और अनामिका का आधा भाग) सुन्न होने लगता है। यह दर्द, जो शुरू में काम के दौरान होता है, बाद में स्थायी हो जाता है और असहज हो जाता है। दर्द निवारक गोलिया, स्टेरॉयड की गोलियां अस्थायी राहत लाती हैं;  लेकिन फिर से, कलाई की इसी गति के कारण ऊतकों में सूजन आ जाती है। और दर्द इतना तेज हो जाता है कि कुछ रोगियों में खराब तंत्रिका को शल्य चिकित्सा द्वारा निकालना पड़ता है। 

इसे कैसे कम किया जा सकता है? उंगलियों को आपस में रगड़कर, हाथों की हथेलियों को आपस में रगड़कर और उंगलियों में गर्माहट पैदा करके समय-समय पर व्यायाम करने से इस विकार को रोका जा सकता है।

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Pain

गर्दन के दर्द और कमर दर्द के लिए देखभाल

आप कंप्यूटर के सामने कैसे बैठते है, इस बात पर निर्भर करता है, की आपको गर्दन ओर कमर दर्द होगा की नही. आपको डेस्कटॉप मॉनिटर और कीबोर्ड के स्तर को देखना होगा। यदि मॉनीटर बहुत अधिक उंचा है, तो गर्दन हर बार उपर देखने पर दर्द करती है। इसके अलावा, आप कंप्यूटर सामने झुककर बैठते है, तो पीठ दर्द और कमर दर्द होता है। गर्दन और रीढ़ की मांसपेशियों मे खिचाव होता है, ओर दर्द शुरू होता है। इस मामले में, सबसे पहले, मॉनिटर की ऊंचाई कीबोर्ड की ऊंचाई से 3 से 4 इंच ऊपर होनी चाहिए। मॉनिटर के सामने झुककर ना बैठे सीधे बैठें। समय-समय पर उठना चाहिये और बीच बीच मे घुमकर आणा चाहिये। साथ ही  धीरे-धीरे नीचे झुकें और अंगूठे को पकड़ने की कोशिश करें। पैरों के दो तलवों को समायोजित करें, एड़ी को ऊपर उठाएं, दोनों हाथों को सिर के ऊपर लाएं, हाथों की हथेलियों को समायोजित करें, और हथेलियों को ऊपर की ओर दबाएं ताकि पेट और पीठ में तनाव हो। इन क्रियाओं को करते समय अपनी सांस को रोककर न रखें।

तनाव को कम करने के लिए

आज इंटरनेट का युग है तो ज्यादा तर लोग कंप्यूटर पर लगे रहते है। कंप्यूटर आने से दूरिया कम हो गई है। ओर दोस्त भी इंटरनेट पर बनणे लगे है। अधिकांश लोगों के कोई दोस्त नहीं होते हैं, और ऐसे लोग जो अकेले होते हैं, तो ऐसे रिश्ते इंटरनेट पर बनाते हैं। ऐसे इंटरनेट सर्फर कुछ दिनो बाद निराश हो जाते हैं, उदास हो जाते हैं। इसके लिए, बच्चों को कम उम्र से ही बाहर खेलने के लिए मजबूर करें! ताकी वो शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक रूप से विकसित हो। ताकि जब वे बड़े हो जाएं और फिर विभिन्न जिम्मेदारियां निभाएं, तो वे तनाव को दूर करने में सक्षम हों। ओर तणाव मुक्त जीवन जिये.

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Feeling

यौन भावनाएँ –

कंप्यूटर आने से ये एक बहोत गंभीर समस्या सामने दिख रही है। कंप्यूटर आने से रिश्ते दूर होते दिखाई दे रहे है। क्यो की कंप्यूटर की दुनिया में कई ऑफिस मे काम करणे वाले जोड़े नौकरी की खातिर एक-दूसरे से दूर रहते हैं। कॉम्पुटर पे चटिंग करणा या व्हिडिओ कालिंग करते रहते है। यदि आप अपने युवाओं को भावनात्मक रिश्ते से मेल खाने का समय नहीं देते हैं, तो ये रंग और गहरे हो जाते हैं और परिणाम तलाक, बहस, झगड़े आदि में परिवर्तीत हो जाते है। एक रिपोर्टें से सामने आया है, की जो कंप्यूटर की कंपनी में काम करते हैं, वो अपनी यौन क्षमता खो रहे हैं! कोई शारीरिक व्यायाम नहीं, कोई ताजा और स्वस्थ आहार नहीं. बैठकर कम करणे की जीवन शैली, मानसिक तनाव, विशाल प्रतियोगिता, व्यसनों आदि चीजो से यौन भावना कम हो रही है। ओर ये समस्या बहोत परेशान करने वाली है। इसलिए अपने शरीर को व्यायाम करणे की आदत डालनी चाहिये, एरोबिक्स, मसल स्ट्रेनिंग, पावर योगा, योगाभ्यास, सूर्य नमस्कार आदि चीजे कारणी चाहिये। नशा, जंक फूड, बाहर का खाना तुरंत छोडना चाहिये। ओर मानसिक शांति के लिए ओमकार जप, सांस लेने के व्यायाम, फल और सब्जीयो का अधिक इस्तेमाल करणा चाहिये ओर सात्विक आहार लेना चाहिये। जब तक हम जीवन शैली को बदलते नही तब तक ये समस्या दूर नही होगी।

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Keep Moving

कंप्यूटर का उपयोग करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए

ध्यान रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें

डेस्कटॉप मॉनिटर एक ऊंचाई पर होना चाहिए। जिसे नग्न आंखों के साथ एक सीधी रेखा में देखा जा सके। जैसे की हम उसे आमने सामने देख सके.

मॉनिटर पर लाइट का सीधा प्रकाश न पडणे दें। जीससे उसकी रोशनी आपकी आखो को नुकसान न पहूच सके।

मॉनिटर पर प्रतिबिंबित प्रकाश या चमक की मात्रा को कम करने के लिए एक कवर मिलता है, वो लगाना चाहिये।

मॉनिटर पर लगातार न देखे। समय-समय पर उठना या पलकें झपकाना चाहिये।

अपने हथेलियों को रगड़ना चाहिये ओर आंखों को गर्म हथेलियों से पोंछें और आंखों पर रखना चाहिये।

ठंडे,साफ पानी से आंखों को हलके हलके साफ करते रहिये।

आंखों की नमी को बनाये रखने के लिये एक नेत्र चिकित्सक की सलाह पर रात में सोते समय दो बुंद डालते रहना चाहिए।

टाइप करते समय, स्ट्रेस को कम करने के लिए डेस्कटॉप मॉनिटर के पास वर्टिकल स्टैंड पर टेक्स्ट रखा जाना चाहिए।

यदि आप हर दिन कंप्यूटर पर काम करते है, तो समय-समय पर उठीये, थोडा टहल कर आईये।  बगीचे में हरे वृक्ष, नीले आकाश को देखते रहिये।

आँख में कुछ दोष जैसे बचपन से ही अत्यधिक ज्यादा संख्या का चष्मा, हकलाना आदि के विकार है, तो नेत्र चिकित्सक से सलाह लेने के बाद ही कॅम्पुटर पर बैठें।

दोस्तों के साथ घुलना-मिलना, आउटडोर गेम खेलना, शौक (पेंटिंग, पढ़ना, संगीत आदि) समय पर खाना, समय पर सोना, कंप्यूटर पर सीधा बैठना, कॅम्पुटर पर बैठते समय स्टूल या कुर्सी, आपके पैर पूरी तरह से जमीन पर होने चाहिए! आपको कीबोर्ड की ऊंचाई बढ़ाने या घटाने में कोई तकलीफ नही होनी चाहिए! टाइप करते समय, जोर से माउस का उपयोग न करें। दोपहर को कभी सोना नही चाहिये, रात में जागना नही चाहिये, रात की पार्टी, शराब, जितना कम कर सकते हो करणा चाहिये। भोजन के समय चाय, कॉफी और सिगरेट की मात्रा आजकल ज्यादा ही बढ़ रही है, कृपया इससे बचें! 

जीवन एक बार ही मिलता है, इसे आप कैसे जिते है, ये आप पर निर्भर करता है। हमे काम तो करणा है, पर इतना भी नही की हम जिना ही भूल जाये। आज टेक्नोलॉजी से हम बहोत पास आ गये है, लेकीन रिश्ते नाते भूल गये है। आप अपने परिवार को कितना समय देते है? आप अपने को कितना समय देते है? इसे सोचना चाहिये। शारीरिक आराम, मानसिक आराम, आत्मिक आनंद, परिवार का प्रेम, दोस्तो के साथ घुमणा,अपनो को वक्त देना ये चीजे भी महत्वपूर्ण है जीवन मे. 

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