क्या आपको निंद (Insomnia) नही आती? समस्या ओर समाधान
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क्या आपको निंद (Insomnia) नही आती? समस्या ओर समाधान

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क्या आपको निंद (Insomnia) नही आती?

मुझे नींद नहीं आती? काफी लोग एक दूसरे को बताते रहते है। आजकल हम लोग भागदौड़ की जिंदगी जी रहे हैं। जिससे हमारे शरीर में बहुत सारी जटिलताएं उत्पन्न हो रही है। शरीर कब किस समस्या से ग्रसित हो जाता है, वो पता ही नहीं चलता। कई कारणों से हमारे आँखों से नींद गायब हो जाती है, और लोग कहते रहते है कि, मुझे नींद क्यो नहीं आती?

यह अनुमान लगाना असंभव है कि जीवन में विभिन्न दर्दनाक घटनाएं आपकी नींद को कैसे प्रभावित करती है। छोटी उम्र में बच्चे आराम से सोते हैं। वही किशोरावस्था में सुबह की नींद ज्यादा गहरी होती है। निंद से मन शांत होता है। नींद से मांसपेशियों को आराम मिलता है। निंद से शरीर में इंद्रियो को शांती मिलती है। कई चीजें हैं जो एक व्यक्ति को अच्छा महसूस कराती हैं, एक अच्छी नींद ही सर्वोच्च आनंद प्रदान करता है। अगर आप किसी को अच्छा खाना-पीना देंगे, भले ही अच्छा घर देंगे, तो भी इन्सान बिना नींद के मर जाएंगे। यह सिद्ध हो चुका है।  हालांकि, आदमी नींद के बिना जल्दी से नहीं मरता है। कुछ लोग 40 से 50 घंटे से 200 से 250 घंटे तक जीवित रह सकते हैं, जो नींद के बिना लगभग 10 से 12 दिन है, लेकिन नींद की कमी, थकान, चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में कमी, भ्रम इस तरह के लक्षण दिखाई देंगे। तो निंद बहोत जरुरी है। बिना निंद के रक्तचाप, मधुमेह, गठिया, अवसाद जैसे कई घातक रोग जड़ लेते हैं। चेहरा सुस्त लगना, आंखों के नीचे काले घेरे आना, हाथ का कांपना, बेहोश होना, आवाज बैठ जाणा जैसे लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं।

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रात मे कितनी निंद लेनी चाहिये

रात को कितनी नींद लेनी चाहिए? इस पर कई मतभेद हैं। क्योंकि कुछ लोगों को रात में 4 घंटे की नींद काफी होती है तो कुछ लोगों को सुबह 10 बजे पानी डालकर उठाना पडता है। यहां तक कि अगर वह उठता है, तो वह दिन की शुरुआत नाराजी से आंखो को मिच मिच कर के उठता है। वास्तव में, नींद इस बात पर निर्भर करती है कि हम क्या खाते हैं और कितना खाते हैं और कितना शारीरिक परिश्रम करते हैं। 8 से 9 घंटे उन लोगों के लिए है जो तैलीय, मसालेदार, तिखा खाना खाते हैं। जो लोग प्रोटीन युक्त भोजन खाते हैं, उन के लिए 6 से 7 घंटे ओर जो लोग केवल फल, कच्ची सब्जियां इसे लेते है उन लोगों को 4 से 5 घंटे की नींद काफी है। बेशक शारीरिक परिश्रम, कड़ी मेहनत, यात्रा, जागृति आदि चीजें कुछ हद तक की जा सकती हैं। बस अपने आहार और नींद को नियंत्रण में रखने की जरूरत है। आपको एक निश्चित समय पर अलार्म सेट करके उठना चाहिए और कुछ व्यायाम, पैदल चलना, तैराकी, साइकिल चलाना या योग करना चाहिए। आपको ये आदत पढ गई तो आपको अलार्म सेट करणे की भी जरुरत नही। आप अपने समय पर उठ जायेंगे। कारण यह है कि लोग सुबह 12-12 बजे तक “मैं बहुत थक गया हूँ” ऐसा कहकर सोते रहते हैं। उसमे ज्यादातर लोगो ने सुबह तक अपनी नींद पूरी कर ली होती है। लेकिन अगले कुछ घंटों तक वे बिस्तर पर पड़े रहते है। ज्यादा निंद भी आपको निराशा मे डाल सकती है। इसलिए शरीर के लिए सही मात्रा में नींद लेना जरूरी है क्योंकि नींद को ‘भूतधात्री ‘ कहा जाता है। ऐसा कहा जाता है कि सभी भूतो की माँ है। जो सभी मनुष्यप्राणी का पालन-पोषण करती है और उनकी रक्षा करती है।

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Enough Sleep

सही मात्रा मे निंद

आपके दिल से रक्त की आपूर्ति का लगभग 15 से 20% मस्तिष्क में जाता है। पर्याप्त नींद की कमी से भूलने की बीमारी हो सकती है। यदि भोजन नहीं मिला तो भी चल जायेगा, आप जिंदा रह सकते हो, लेकिन अगर नींद नहीं आती है, तो एक व्यक्ति जल्दी से मर जाता है।

आपको पता है, सभी जानवरों में से, अजगर सबसे अधिक 18 घंटे सोता है, जबकि जिराफ कम से कम सोता है, केवल 2 घंटे। शिशु 16-16 घंटे सोते हैं, लेकिन बुढ़ापे में यह नींद 4 से 5 घंटे तक कम हो जाती है।

अनिद्रा दो प्रकार की होती है। पहले प्रकार में, नींद बिल्कुल नहीं आती है, जबकि दूसरे प्रकार में, नींद किसी बीमारी या चिंता के कारण नही आती। पहले मामले में, कुछ दुर्भाग्यपूर्ण लोगों को रात की अच्छी नींद नहीं आती है और मजे की बात है की उनको कोई चिंता, मानसिक परेशानी और बीमारी भी नहीं है! जब की 80% लोगों में, अनिद्रा मानसिक तनाव के कारण होती है, और निश्चित रूप से, घर पर तनाव, व्यापार में उतार-चढ़ाव, चिंताओं के कारण मानसिक तनाव बढ़ाता है और अनिद्रा को जन्म देता है। सबसे बडा कारण है तणाव।

कभी-कभी बुरे सपने नींद की कमी का कारण बनते हैं। कभी-कभी लोग सोते नही इसलिए की उन्हें सपने आते है। नींद न आना एक सामान्य लक्षण है। कुछ निराशावादी, कायर लोग जन्म के समय से ही ज्यादा सोते हैं। बुढ़ापे में नींद कम हो जाती है, लेकिन वास्तव में, दोपहर की झपकी लेने पर भी कई पुराने लोग रात को जल्दी सो नही पाते।

शरीर में तेजी से फैलने वाली संवेदनाएं नींद को परेशान करती हैं और एक बार जब व्यक्ति जाग जाता है, तो वह फिर से सो नहीं सकता है। ज़ोर का शोर, (जैसे कि लाउड स्पीकर, डॉल्बी साउंड, टीवी के वॉल्यूम में अचानक वृद्धि, आदि), इस तरह की नींद में खलल पडती है। लंबे समय तक एक ही अंग पर सोने के बाद और यदि हाथ अंग के नीचे पाया जाता है, तो अचानक हाथ में झुनझुनी दिखाई देती है, ऐसा लगता है जैसे कोई हाथ नहीं है और वह जाग जाता है और फिर सो नहीं पाता। इसके अलावा, कुछ लोगों की नींद में चलने की आदत होती है!  खासतौर बच्चों में यह आदत होती है। कुछ बीमारियों के कारण निंद नही आती है। जैसे की गंभीर पित्त की समस्या, (अल्सर), गुर्दे में दर्द, सिने मे दर्द  के दौरे आदि के वजह से निंद नही आती।

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Don’t work, sleep

निंद क्यो जरुरी है

नींद शरीर और मन के लिए आराम की स्थिति है, प्रकृति ने नींद की योजना बनाई होगी। प्रकृती ने सभी के लिये सही तरीके से जिने का मार्ग दिखाया है। क्योंकि जन्म से पहले, जब बच्चा मां के गर्भ में था और जन्म के बाद, जब वह छोटा था, तो बच्चा लंबे समय तक सोता है,  लेकिन जैसे-जैसे बडा होने लगता हैं, नींद कम आने लगती है।

रात में नींद आना स्वाभाविक है। प्रकृति हमें दिन के दौरान कड़ी मेहनत करने और रात में सोने के लिए कहती है। कब सोना चाहिए! कितनी नींद!  इस अनुत्तरित प्रश्न को संबोधित करने की आवश्यकता है।  प्रकृति के नियमों के अनुसार, रात में 9 से 12 के बीच का समय है जब हमें रात में अच्छी नींद आती है और यह 3 घंटे की नींद लगभग 6 घंटे की नींद का फायदा दिलाती है। रात को 12 बजे से सुबह 3 बजे तक नींद यह लगभग 3 घंटे के नींद की तरह आराम देता है, फिर सुबह 3 बजे से 6 बजे तक निंद जो बहुत ही हीन माना जाता है और यह केवल डेढ़ घंटे की नींद देता है। हम दुर्भाग्य से केवल 9 से 12 की अवधि के दौरान जाग रहे हैं। रात के 11 बजे तक, फिर सब कुछ लपेटकर 12 बजे बिस्तर पर जाते है।  फिर अगली बार नींद की गुणवत्ता मध्यम और हीन होती है, शरीर सुबह उठता नहीं है क्योंकि उसे पूरा आराम नहीं मिलता है और इसलिए 8-9 बजे तक लुढ़कने के बाद भी आराम महसूस नहीं होता। रात में सोने और दिन के दौरान कड़ी मेहनत करने का प्रकृती का नियम है। रात में 9 से 12 के बीच होने वाली गहरी नींद को ‘डेल्टा स्लीप आवर्स’ कहा जाता है। क्योंकि उस दौरान मस्तिष्क के स्थान पर डेल्टा नामक तरंगें पाई जाती हैं। ओर निंद पुरी होती है।

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कुछ कारण भी निंद न आने के  

रात को सोते समय व्यसनों (कॉफी, चाय, सिगरेट, धूम्रपान, आदि) के कारण जागना और अतिरिक्त बात करना (विशेषकर बात करते समय बिस्तर पर लेटने का शौक) इस कारण निंद खराब होती है। निंद न पुरी होने से फिर अवसाद आता है, निराशा शुरू होती है,मनोचिकित्सक की ट्रीटमेंट शुरू होती हैं। नींद के लिए दवाएं दी जाती हैं और इस वजह से लोग दिन-रात झूठी कृत्रिम नींद का आनंद लेते हैं। नींद महंगी गोलियों के साथ खरीदी जाती है। अक्सर जोड़ों के दर्द, अस्थमा, गैस, अपच, नाराज़गी, पेट दर्द, सिरदर्द, पुरानी खांसी के कारण नींद नहीं आती है और जब इन कारणों को हटा दिया जाता है, तो कुछ लोग शांति से सोना शुरू कर देते हैं। जबकि कुछ लोगो को वाहनों का शोर, रेलवे की पटरियों के पास घर, लंबी यात्रा, शोर, भ्रम, आदि कारणो नींद नही आती। चाय, कॉफी, तम्बाकू, सिगरेट और शराब जैसे व्यसन नींद की कमी का कारण बनते हैं। क्योंकि कैफीन, निकोटीन जैसे विष मस्तिष्क को कुछ समय तक सक्रीय रखते हैं और ये अस्थायी आराम करते हैं। फास्ट फूड, बेकरी उत्पादों, मांस, मसालेदार खाद्य पदार्थों की अधिकता, देर रात तक जागने, रात भर पढ़ाई करने, देर रात की फिल्में, धारावाहिक, डांस शो अनिद्रा से स्वास्थ्य ख़राब हो जाता है।

अच्छी निंद लेना चाहते हो तो

यदि आप एक अच्छी रात की नींद लेना चाहते हैं, तो बिस्तर पर जाने से ढाई से तीन घंटे पहले आपको रात का भोजन करना चाहिए! रात के पिणे में बिना शक्कर मिला दूध लें। ऐसा इसलिए है क्योंकि दूध में ट्रिप्टोफैन नामक एक एमिनो एसिड होता है, जो प्राकृतिक नींद को बढ़ावा देता है। दोपहर के भोजन के लिए एक कप छाछ लें। दिन भर में हर घंटे पानी पीना, लेकिन भोजन करते समय थोडा ही पानी पीना चाहिए। रात का भोजन कम मात्रा में लेना चाहिए। बुजुर्ग, बैठा काम करने वाले, रोग से ग्रसित रोगियों को रात में फल, दूध, या मुट्ठी भर खाना खाना चाहिए। दूसरी ओर, लोग दोपहर में कम और रात में अधिक भोजन करते हैं। सुबह व्यायाम नहीं करते, टहलने के लिए नहीं जाते, भोजन के बाद शतपावली नहीं करते। अगर आप ये करते हो तो आप को अच्छी निंद आयेगी। ओर एक बात, आप एक अच्छी रात की नींद चाहते हैं, तो अपनी दोपहर की नींद को पूरी तरह से भुलना होगा।

आपको एक अच्छी रात की नींद के लिए सांस ही लेना है तो आपकी सोने की जगह, चादरें, बिस्तर की चादरें साफ होनी चाहिए, गहन प्रकाश, नींद की जगह में तेज हवा नहीं चाहिये, मच्छर, चींटियां, मक्खियां होंगी तो निंद नही आयेगी। रेडियो, टी.वी. नही चाहिये। बिस्तर पर जाने से पहले, आपको हल्के सूती कपड़े पहनना होगा, अपने हाथ, पैर, मुंह साफ करना होगा, प्रार्थना करें, ओंकार उच्चारण करे, निंद का मुख्य उद्देश ये है की, पहले शरीर को आराम देना है, ताकि उसकी शरण में रहने वाले मन को आराम मिले।

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रात की अच्छी नींद के लिए

बिस्तर पर जाने से पहले अपने हाथ और पैर धो लें!बेडरूम में टीवी, एलसीडी, एलईडी आदि नही रखे। पैर के तलवे पर घी या तेल (नारियल) मालिश करे! कम आवाज मे संगीत में सुने! सूर्यास्त के बाद मिठाई, मीठे फल, मिठाई, चॉकलेट, आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक, चाय, कॉफ़ी बंद करें! बिस्तर पर जाने से 2 घंटे पहले दूध लें, प्रोटीन शेक लें! दूध में थोड़ा सा जायफल और इलायची मिलाएं। रात को अच्छी नींद पाने के लिए शयनकक्ष को ढंक कर रखें और शयनकक्ष को साफ रखें। अपने शरीर के तापमान को कम करने के लिए, खिड़कियों को खुला रखें और मच्छरदानी लगाकर सोएं! सोते समय धीमी आवाज में ओंकार जप करे और फिर अपने मन में ओंकार का जप करें! रात में बहुत सारे झगड़े और हिंसा के साथ डरावनी फिल्में न देखें!  घरेलू विवादों वाले धारावाहिक न देखें! रात को सोते समय चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक, आइसक्रीम न लें! रात को काम करते समय मोबाइल पर बात करना, लैपटॉप पर काम करना, ई-मेल देखना आदि। चीजें नींद को प्रभावित करती हैं। उस चीज से निकलने वाले विकिरण से शरीर, आंखों और मस्तिष्क के गुप्त अंगों पर गंभीर प्रभाव पड़ता है और नींद कम होती है। भोजन, पानी और हवा जैसे स्वास्थ्य के लिए जरुरी है वैसेही नींद भी बहुत जरूरी है।

इसलिए, सोने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। यदि आप सो नहीं सकते हैं, तो बिस्तर पर जाने से पहले एक घंटे के लिए गुण गुणे पानी से स्नान करें, सर पर नारियल का तेल लगाएं, कान में कुछ बूंदें डालें, कम आवाज मे संगीत सुनें, किताब पढ़े, भोजन मे गुड़ का उपयोग करे, दूध आदि ले।  अपने मन मे जिस किसी भगवान को मानते हो तो उसका नामस्मरण करे।

कुछ आसन जो आपको उपयोगी हो सकते है

पद्मासन-

स्वस्तिकासन

प्राणायाम

ओंकारजाप

ध्यान

शवासन

अनुलोम विलोम

भ्रामरी

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