मासिक धर्म क्या है?

मासिक धर्म क्या है?

  • Post author:

इस आधुनिक दुनिया में, भले ही आदमी को विचार की स्वतंत्रता हो, चाहे वह खुद को कितना भी स्वतंत्र कहे, लेकीन कुछ चीजें हैं जो स्वतंत्र रूप से और दिल खोल कर नहीं हो सकती हैं. उनमें से एक है माहवारी. उसे (Menstural Cycle or MC) कहते है.

आज हम बात करेंगे महावारी (पीरियड्स) के बारे मे..

माहवारी को एक महिला के शरीर में परिवर्तन को कर्मिक मानसिकता के कारण पाप के रूप में देखा जाता है, इसलिए महिलाओं को इस मासिक धर्म के कारण कई स्थानों पर अवमानना ​​भी झेलनी पड़ती है. सभी धर्मों में, मासिक धर्म के दौरान उनको काफी तकलीफे सहन करणा पडता है,बहोत सारे रिती-रीवाजो के कारण उन्हे अलग रखा जाता है. उन्हें एक कोने में रहना पड़ता है. उनको देखने का नजरिया बदल जाता है. ऐसी भी प्रथाएं हैं कि कोई भी उन्हें छू नहीं सकता है.

आईये जानते माहवारी के बारे मे,

मासिक धर्म आमतौर पर 10 से 15 वर्ष में शुरू होता है. पहले साल या दो साल के लिए, यह नियमित नहीं रहता. डेढ़ महीने में आता है. यह हार्मोन की अनियमित अपरिपक्वता के कारण है. समय के साथ, मासिक धर्म नियमित हो जाता है. ढाई से तीन महीने का अंतर होता है नियमित होणे मे. गर्भाशय की परत पर मोटी और अनियमित हो जाती है और अत्यधिक रक्तस्राव होता है. 10 से 15 साल की आयु की लड़की के अण्डाशय हर महीने एक विकसित डिम्ब (अण्डा) उत्पन्न करना शुरू कर देते हैं. वह अण्डा अण्डवाहिका नली के द्वारा नीचे जाता है जो कि अंडाशय को गर्भाशय *ताकतवर बीज* अण्डा गर्भाशय में पहुंचता है,उसका अस्तर रक्त और तरल पदार्थ से गाढ़ा हो जाता है. ऐसा इसलिए होता है कि यदि अण्डा उर्वरित हो जाए, तो वह बढ़ सके और शिशु के जन्म के लिए उसके स्तर में विकसित हो सके. यदि उस डिम्ब का पुरूष के शुक्राणु से सम्मिलन न हो तो वह स्राव बन जाता है जो कि योनि से निष्कासित हो जाता है. इस स्राव को मासिक पालीया रजोधर्म या माहवारी या एमसी कहा जाता है. व्यक्ति तितक्या  प्रकृति. कुछ वैसा ही है. मासिक धर्म चक्र 22 से 35 दिनों तक रहता है.

महावारी जल्दी या देर से न आएं. ये अनियमितता के लक्षण है, स्राव तीस से अस्सी मिलीलीटर तक हो सकता है. लेकिन स्राव को मापा नहीं जा सकता. यदि दिन में चार या पाँच पैड भरे हुए हैं, तो थकान अधिक  होती है, हीमोग्लोबिन का स्तर ग्यारह से नीचे है, तो घातक है. इसे समय पर देखा जाना चाहिए.एक लड़की या महिला का स्राव तीस से अस्सी मिलीलीटर होता है.चौबीस दिनों की महावारी पैंतीस दिनों की अवधि ले रहा है तो यह सामान्य नहीं है. आपको तुरंत डॉक्टर से सलाह लेणी चाहिये.

शिक्षण :

सेक्स शिक्षा, जीवन कौशल, शिक्षा या प्रशिक्षण कहते हैं, तो इसके पीछे का उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिये. किशोर लड़कों और लड़कियों को यौन,भावनात्मक,शारीरिक मुद्दों,सामाजिक और सांसारिक जीवन में कठिन मुद्दों से निपटने के लिए और खुद की सुरक्षा के बारे में जानकारी मिलनी चाहिये. घर के माता-पिता शारीरिक बदलावों के बारे में खुलकर बात नहीं कर सकते,क्योंकि वे असुरक्षित महसूस करते हैं कि उनके बच्चे बिगड़ जाएंगे. लेकिन हम भूल जाते हैं कि बाहरी दुनिया में बच्चे जो देखते हैं,उस पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं है,वे जिन लोगों के संपर्क में आते हैं, उनको वहा गलत जगह से गलत जानकारी प्राप्त होती है ओर वो बहोत खतरनाक हो सकती है.

हमे उन्हे शरीर रचना विज्ञान,जननांग संरचना और कार्य,मासिक धर्म, इस पर कार्य करणा चाहिये. बड़े बच्चों के लिए सेक्स क्या है,प्रजनन और यौन स्वास्थ्य क्या है? गुप्त रोग क्या है? ऐसे सवालों के वैज्ञानिक जवाब खुले वातावरण में दिए जाना चाहिये.

images

लड़कियों के सवाल के संबंध मे मासिक धर्म की गलत धारणाओं, सामाजिक प्रतिबंधों,रीति-रिवाजों,अचार को क्यों नहीं छूते,पूजा क्यों नहीं करते,सफेद पानी,डायटिंग,मोटापा,ऐसे अनोको प्रश्नो के क्या अर्थ है? इसके बारे मे जानकारी देणी चाहिये.

मासिक धर्म स्वाभाविक है.इसके बारे में कुछ भी अशुद्ध नहीं है. मंदिर में नहीं जाना,अचार को न छूना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है. इसका  वैज्ञानिक ​​चिकित्सा में कोई संदर्भ नहीं आता.

मोटापा अगर बढा है तो उन लडकीओ को अपना वजन कम करणा होगा. आहार परिवर्तन करणा होगा ओर सात्विक आहार लेना होगा,व्यायाम इसके लिए प्राथमिक और महत्वपूर्ण उपचार है. वजन घटाने पर इंसुलिन का सही प्रभाव पड़ता है. अन्य हार्मोन के संतुलन में सुधार करता है. मासिक धर्म नियमित करता है. यदि वजन कम नहीं होता है,तो शरीर की प्रतिक्रिया को बेहतर बनाने के लिए नैसर्गिक साधनो ओर सात्विक आहार का उपयोग किया जाना चाहिये.

जिनको थायरॉयड है उनको ज्यादातर ये प्रोब्लेम होता है, थायरॉयड ग्रंथि आपके गले में श्वासनली के बगल में होती है. इसमें थायराइड हार्मोन का अत्यधिक बढना या निम्न स्तर कम होणा मासिक धर्म चक्र पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है. मासिक धर्म बिल्कुल नहीं आता है,कभी कभी जल्दी आता है या देर से आता है और अत्यधिक रक्तस्त्राव होता है यह विकार अनुवांशिक भी हो सकता है. रक्त परीक्षण द्वारा थायराइड निदान किया जाता है. माहावारी को सही उपचार के साथ नियमित और नियंत्रित किया जा सकता है.

घरेलू उपाय:

अनियमित मासिक धर्म में,कुछ घरेलू चीजों को अपनाना चाहिए. आज हम आपको कुछ ऐसे घरेलू उपाय बताने जा रहे हैं. मासिक धर्म की अनियमितताओं से निपटने के लिए.

सबसे पहले आपको व्यायाम करणा चाहिये, रोज 20 -25  मिनिट आपको हलका हलका दौडणा चाहिये. रोज सुबह सूर्यनमस्कार करणा चाहिये. अनुलोम – विलोम, भ्रस्तिका, ये धीर धीरे करणा चाहिये.

आपको एक गिलास गर्म दूध के साथ 5-10 ग्राम अजवाइन का सेवन करना चाहिए। इसके अलावा 5-6 ग्राम दालचीनी पाउडर को पानी के साथ लेने से भी मासिक धर्म की दर्द से राहत मिलती है.

मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द से राहत पाने के लिए अधिकतर लड़कियां दर्द कम करनेवाली गोळी का सहारा लेती हैं. लेकिन अगर आप नैसर्गिक तरीकों से इस दर्द से मुक्ति पाना चाहती हैं तो तुलसी का सेवन करें. यह एक नैसर्गिक दर्द निवारक गोली की तरह काम करता है. इसके सेवन के लिए आप तुलसी के पत्तों को चाय में डालकर पी सकती हैं या फिर पानी में तुलसी के पत्ते डालकर उबालें और फिर छानकर उस पानी का सेवन कर सकती है. आप चाहें तो इस पानी में शहद भी मिलाकर कर के पी सकती हैं.

अदरक के सेवन से भी आराम मिलता है, इसके सेवन के लिए आप चाहें तो पानी में अदकर डालकर उबालें और फिर इसे छानकर शहद मिलाकर सेवन करें. इससे भी आपको काफी राहत महसूस होगी.

अगर आपको ज्यादा तकलीफ है तो डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिये.

Leave a Reply