नीले पत्थर कि कहाणी…

नीले पत्थर कि कहाणी…

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amol11 2

ये एक बहोत पुराणी कहाणी है, किसी आटपाट गाव एक शहर में बहुत ही ज्ञानी प्रतापी साधु महाराज आये हुए थे, बहुत से दीन दुखी, परेशान लोग उनके पास उनकी कृपा दृष्टि पाने हेतु आने लगे. ऐसा ही एक दीन दुखी, गरीब आदमी उनके पास आया और साधु महाराज से बोला ‘ महाराज में बहुत ही गरीब हूँ, मेरे ऊपर कर्जा भी है,ओर मेरे घर कि हालत भी माली है, मै क्या करू मुझे कूछ भी समज मी नही आ रहा. मैं बहुत ही परेशान हूँ। मुझ पर कुछ उपकार करें’, मेरे उपर आपकी कृपा बरसाये, मेरी सारी परेशानिया दूर कर दिजीये.

ज्ञानी प्रतापी साधु महाराज ने उसको एक चमकीला नीले रंग का पत्थर दिया, और कहा ‘कि यह कीमती पत्थर है, जाओ जितनी कीमत लगवा सको लगवा लो। वो आदमी वहां से चला गया और उसे बेचने के इरादे से अपने जान पहचान वाले एक साधारण दुकान विक्रेता के पास गया और उस पत्थर को दिखाकर उसकी कीमत जाननी चाही।

दुकान विक्रेता तो साधारण था,उसने अपनी समज नुसार उस पत्थर कि किमत लगाई. बोला ‘मुझे लगता है ये नीला शीशा है, साधू महाराज ने तुम्हें ऐसे ही दे दिया है, हाँ यह सुन्दर और चमकदार दिखता है, मै इसे खरीद लेता हु, लेकीन मै इसके तुम्हें 100 रुपए दूंगा.

वो आदमी निराश होकर अपने एक अन्य जान पहचान वाले के पास गया जो की एक व्यापारी था. उनसे उस व्यापारी को भी वो पत्थर दिखाया और उसे बेचने के लिए उसकी कीमत जाननी चाही। वो व्यापारी बोला ‘यह पत्थर कोई विशेष रत्न है में इसके तुम्हें 1000 रुपए दे दूंगा. वह आदमी सोचने लगा की इसके कीमत और भी अधिक होगी और यह सोच वो वहां से चला आया.

उस आदमी ने इस पत्थर को अब एक सुनार को दिखाया, सुनार ने उस पत्थर को ध्यान से देखा और बोला ये काफी कीमती है इसके मैं तुम्हें 10,000 रूपये दे दूंगा। वो अभी विचार करणे लगा, इन तीनो ने अलग अलग इस पत्थर किमत लगाई है.

वो आदमी अब समझ गया था कि यह बहुत अमुल्य है, उसने सोचा क्यों न मैं इसे हीरे के व्यापारी को दिखाऊं, यह सोचकर वो शहर के सबसे बड़े हीरे के व्यापारी के पास गया।उस हीरे के व्यापारी ने जब वो पत्थर देखा तो देखता रह गया, चौकने वाले भाव उसके चेहरे पर दिखने लगे.  उसने उस पत्थर को माथे से लगाया और और पुछा तुम यह कहा से लाये हो. यह तो अमुल्य है. यदि मैं अपनी पूरी सम्पति बेच दूँ तो भी इसकी कीमत नहीं चुका सकता.

वो पत्थर लेकर साधू के पास गया. वो बोला कि मै पहले दुकान विक्रेता के पास गया तो उसने मुझे इस पत्थर कि किमत 100 रुपये बताई फिर मै व्यापारी के पास गया तो उसने 1000 बताई  फिर मै सुनार के पास गया तो उसने मुझे इस पत्थर कि किमत 10000 बताई ओर आखिर मे जब मै हिरे के व्यापारी के पास गया तो उसने बताया कि इस पत्थर कि किमत अमूल्य है. मुझे ये बटणे का प्रयास करे कि सब लोगो ने अलग अलग किमत क्यो लगाई. तब साधू महाराज ने उसको समझाया… हम अपने आप को कैसे आँकते हैं.  क्या हम वो हैं जो राय दूसरे हमारे बारे में बनाते हैं. आपका जीवन  अमूल्य है आपके जीवन का कोई मोल नहीं लगा सकता. आप वो कर सकते है जो दुसरा आपके बारे राय बनाता है. आप खुद को पहचानो. कभी भी अपने को कम मत समजणा.  कभी भी दूसरों के नकारार्थी विचारो से प्रभावित मत होणा. दुसरो से अपने आप को कम मत आकियें.

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