Thyroid – क्या आप जाणते है…
Qwickin.com

Thyroid – क्या आप जाणते है…

  • Post author:

थायराईड

आज के आधुनिक युग मे शरीर बिमारियो का घर बन गया है। कोई ना कोई बिमारी इस शरीर रुपी घर मे बसी है। ओर इस परिस्थिती के लिये जिम्मेदार हम ही लोग है। क्योकी आज का रहण सहन बिलकुल बदल गया है ओर जिसे हम आधुनिकता का नाम देते है। लेकीन हम ये नही सोचते की इस आधुनिकता के कारण हमारा शरीर बंजर खेती जैसा बनता जा रहा है। प्रकृती ने हमे वरदान मे बहोत सारी चीजे दि है. जैसे की हवा, पाणी, जमीन मे उपजने वाली सब्जी, फल, फुल, इन सबको छोडकर हम डब्बाबंद खाना, पाकीट बंद, बॉटल बंद, बाजार का खाना, बिस्कीट, नुडल्स, चिप्स, ब्रेड, केचअप, चाय, काफी ये सब चीजे खाना शुरू कर दिया है। ओर यही से शूरवात हो गई शरीर को खोकला करणे की ओर शरीर बिमारियो का घर बनाने की।

अति संवेदनशील बिमारी

आज हम ऐसे ही घातक बिमारी के बारे मे जानकारी लेंगे, जिसे “थायराईड” कहते है। थायरॉयड शरीर में एक बहुत ही महत्वपूर्ण ग्रंथि है जो तितली की तरह दिखती है और गर्दन के किनारे पर स्वरयंत्र के नीचे स्थित होती है। यह एक पदार्थ है जिसे थायरोक्सिन (T4) कहा जाता है। यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण हार्मोन पैदा करता है और इसे रक्तप्रवाह में छोड़ता है और शरीर की सभी चयापचय गतिविधियों को नियंत्रित करता है। थायराइड भी ट्राइ-योडोथायरोनिन (T3) नामक हार्मोन का उत्पादन करता है। इस स्थिति को हाइपरथायरायडिज्म कहा जाता है। इन दो हार्मोनों, T4 और T3 के निर्मिती और स्राव को थायरॉयड स्टीम्युलेटींग हार्मोन (टीएसएच)  द्वारा नियंत्रित किया जाता है, जिसे पिट्यूटरी कहा जाता है। मस्तिष्क के आधार पर यह ग्रंथियों से आता है। हार्मोन टीएसएच का स्तर यह जानने में मदद करता है कि क्या थायरॉयड ग्रंथि ठीक से काम कर रही है। थायरॉक्सिन हार्मोन वसा, प्रोटीन और कार्ब्रोहाइड्रेट के मेटाबोलिज्म को बढ़ाता है। यह रक्त में शर्करा, कोलेस्टेरोल तथा फास्फोलिपिड की मात्रा को कम कर देता है। लाल रक्त कोशिका के निर्माण को बढ़ा कर रक्ताप्लता की रोकथाम करता है। यह हड्डियों, पेशियों, लैंगिक तथा मानसिक वृद्धि को नियंत्रित करता है। यह दुग्ध स्राव को भी बढाता है। यह हृदय गति एवं रक्तचाप को नियंत्रित करता है।

थायराईड मे आयोडीन का महत्व…

T3 और T4 , थायरॉयड हार्मोन आयोडीन द्वारा निर्मित होते हैं और आहार में आयोडीन की कमी थायरॉयड ग्रंथि के कार्य को बाधित करती है। बेशक जमीन और पानी में आयोडीन की मात्रा फसल में आयोडीन की मात्रा पर निर्भर करती है और यह फसल से हमें मिलती है। लेकीन आज फसल को बढाने, ज्यादा उत्पादन लेणे के लिये रासायनिक खाद की वजह से जमीन पोषकता कम हो गई। वहा से मिलणे वाला विटामिन हमे नही मिल पाता। ओर बाजार से मिलणे वाला पाणी मे भी आयोडीन नही होता। जीससे शरीर कमजोर बनता है। यह आयोडीन नमक के माध्यम से शरीर को दिया जा सकता है। ओर बाजार मे मिलने वाले नमक मे आयोडाइज्ड होता है, लेकीन उसको शुद्ध करणे से उसमेसे पोषक तत्व (आयोडीन) कम मात्रा मे मिलता है। बाजार मे मिलणे वाले नमक से बेहतर है पहाडी नमक, Rock साल्ट, जिसे हम संध्या नमक कहते है। ये साधारण नमक से बेहतर है। ओर इसमे आयोडीन की मात्रा भरपूर होता है।  आयोडीन की कमी शरीर के चयापचय को धीमा कर देती है और आपको मोटा बना देती है। जब हम जो भोजन करते हैं तो उसका पाचन हो जाता है, ओर यही मुख्य रूप से ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता है, जो कोशिकाओं में संग्रहीत होता है। हालांकि, हाइपोथायरायडिज्म में हार्मोन T3 ओर T4  का उत्पादन कम हो जाता है, जो भोजन के चयापचय को धीमा कर देता है। उससे ऊर्जा बनाने का काम धीमा हो जाता है और फिर वसा जमा होने लगती है और वजन बढ़ने लगता है। इन रोगियों में भूख में कमी, वजन बढ़ना, उत्साह में कमी, अवसाद, ठंड लगना, बालों का झड़ना, याददाश्त कम होना, थकान, कब्ज, शुष्क त्वचा, एकाग्रता में कमी, एम.सी. शीघ्रपतन, समय से पहले स्खलन, गर्भधारण के मामले में गर्भपात, आवाज बैठना, थायरॉयड ग्रंथि (Subacute Thyriditis) मे सुजन के लक्षण दिखाई देते हैं।  साथ ही लिथियम, सल्फोनामाइड्स, फेनिलब्यूटाझोन आदि  इसी तरह की दवाओं के अति प्रयोग के कारण हाइपोथायरायडिज्म हो सकता है। एक बार निदान करने के बाद, उचित हार्मोन उपचार के बाद वजन जल्दी से कम हो जाता है और रोगी काम करना शुरू कर देता है और ऊर्जावान दिखता है। दूसरी ओर, हाइपरथायरायडिज्म, T3 और T4 हार्मोन के अत्यधिक स्तर का उत्पादन करता है।  नतीजतन, आवश्यकता से अधिक ऊर्जा का उपयोग किया जाता है, वजन बहुत तेजी से कम हो जाता है। कुछ रोगियों को प्रति माह 10 से 15 किलो भी वजन कम होता है, सीने में जकड़न, भय, थकान, धड़कन बढने, गर्मी, वजन में कमी, कमजोरी, हाथों की हथेलियों में पसीना, बालों का झड़ना, महिलाओं में शीघ्रपतन, अनिद्रा, सांस की तकलीफ, स्वभाव मे चिड़चिड़ापन, भूख में वृद्धि, पतले दस्त, सफेद पदार्थ की अधिक जाणा आदि। आपको विशेषज्ञ की सलाह से उचित परीक्षण के बाद थायराइड उपचार कर सकते हो।

पुरुषों की तुलना में महिलाओं को थायरॉयड रोग होने की संभावना 5 गुना अधिक है। उनके शरीर में एम.सी., गर्भावस्था, प्रसव, शरीर और मस्तिष्क पर पारिवारिक तनाव के कारण अधिक थायराइड ग्रंथि की बीमारी महिलाओं में ज्यादा पाई जाती है।

हाइपोथायरायडिज्म- Hypothyroidism

यह महिलाओं में अधिक पाया जाता है।  यह गर्भावस्था और रजोनिवृत्ति के दौरान एक महिला के शरीर में परिवर्तन के कारण महिलाओं में अधिक आम है। निरंतर तनाव से भरा जीवन इस बीमारी का एक प्रमुख कारण है। ऐसा होने से रोकने के लिए, आहार में आयोडीन की मात्रा बढ़ाना आवश्यक है।

उपचार…

किसी भी बिमारी को जड से खत्म करणे के लिये आपको अपने आहार मे बदलाव लाना पडेगा। जब तक आप अपने आहार मे बदलाव नही करेंगे तब तक आपको लाभ नही मिलेगा। सात्विक आहार आयुर्वेद और योग साहित्य में सुझाए गए खाद्य पदार्थों पर आधारित एक आहार है। जिसमें गुणवत्ता (गुना) सत्त्व होता है। आहार वर्गीकरण की इस प्रणाली में, शरीर की ऊर्जा को कम करने वाले खाद्य पदार्थों को तामसिक माना जाता है, जबकि शरीर की ऊर्जा की वृद्धि करने वाले खाद्य पदार्थों को राजसिक माना जाता है। एक सात्विक आहार खाद्य पदार्थों और खाने की उन आदतों को शामिल करता है, जो “शुद्ध, आवश्यक, प्राकृतिक, महत्वपूर्ण, ऊर्जा युक्त, स्वच्छ, जागरूक, सत्य, ईमानदार, बुद्धिमान” हैं।  एक सात्विक आहार धार्मिक तत्व, अहिंसा, अहिंसा के सिद्धांत, या अन्य जीवित चीज़ों को नुकसान न पहुंचाने जैसी बातों को भी शामिल करता है और, यही कारण है कि योगी अक्सर शाकाहारी आहार का पालन करते हैं.

सात्विक भोजन में ताज़ा फल, ताज़ा सब्ज़ियां, अनाज, दालें, अंकुरित दालें, नट्स, बीज, शहद, जो सीधे प्रकृती से आपको मिलता हो वही आपको खाणे मे लेना है। सात्विक भोजन पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जो शरीर को विटामिन, खनीज पदार्थ, एंटीऑक्सीडेंट, प्रोटीन और फैट्स प्रदान करता है। ये सभी चीज़ें बीमारियों को दूर करके शरीर की इम्यूनिटी को बढ़ावा देती हैं।

अगर आप सात्विक भोजन लेना चाहते हैं, तो इन चीज़ों को खाने में शामिल न करें:

चीनी: सफेद चीनी, कॉर्न सिरप, टॉफी या सोडा।

तला खाना: फ्राइज़, तली हुई सब्ज़ियां, पैटीज़ या समोसे आदि।

जंक: चिप्स, चीनी युक्त कॉर्न फ्लेक्स, फ्रोजन खाना आदि।

रिफाइन्ड पदार्थ: सफेद ब्रेड, बेगल, केक, बिस्किट आदि।

मांस: मटन, मच्छली, चिकन आदि।

कुछ सब्ज़ियां: प्याज़, डुरियन, हरी प्याज़ और लहसुन।

इसके अलावा शराब, कोल्ड डिंक्स, चाय और कॉफी जैसी चीज़ों से भी दूर रहना होगा।

महत्वपूर्ण बात….

ओह, हाँ … एक और बात है जो महत्वपूर्ण है, हाइपोथायरायडिज्म से मोटापा बढता है और डॉक्टर डाइटिंग करणे के लिये बोलते है। कम कैलोरी वाले खाद्य पदार्थों का सेवन किया जाता है और निश्चित रूप से कम कैलोरी वाले खाद्य पदार्थों के चयापचय की आदत थायराइड को दिन प्रतिदिन कमजोर बनाती है। तो सावधान रहो!  हाइपोथायरायडिज्म में उचित आहार (पोषक तत्वों से भरपूर), नियमित व्यायाम और समय पर आराम और पर्याप्त नींद शामिल करणा बहोत जरुरी है! साथ ही हाइपोथायरायडिज्म से पीड़ित लोगों को नियमित रूप से साइकिल चलाने या तैराकी अभ्यास करना चाहिये। जिससे हड्डियों और जोड़ों को अधिक नुकसान नहीं होता।

साथ ही, थायराईड मे आसन बहोत महत्वपूर्ण कम करते है। इससे आपके शरीर मे उर्जा की अनुभूती होती है। कुछ आसन है, जो आपको थायराईड मे लाभकारी साबित होंगे।

सर्वांगासन, ताड़ासन, त्रिकोणासन, भुजंगासन, धनुरासन, उष्ट्रासन, सिंहासन आदि। और साथ मे भ्रामरी,  उज्जायी ज्यादा लाभ मिलता है।

This Post Has One Comment

  1. Mahesh

    Khup chhan mahiti dili

Leave a Reply